लक्ष्मी पूजा 2026: 8 नवंबर 2026
लक्ष्मी पूजा 2026 8 नवंबर 2026 को है। पूजा का समय हर जगह एक नहीं होता: वह सूर्यास्त और उदित राशि से तय होता है, और दोनों इस पर निर्भर हैं कि आप कहाँ हैं। नीचे की तालिका हर शहर के लिए गणना की गई है।
लक्ष्मी पूजा 2026 - शहर अनुसार पूजा मुहूर्त
| शहर | पूजा मुहूर्त | प्रदोष काल | सूर्यास्त |
|---|---|---|---|
| Delhi | 17:54 – 19:50 | 17:27 – 19:51 | 17:27 |
| Mumbai | 18:27 – 20:27 | 17:58 – 20:22 | 17:58 |
| Bengaluru | 18:18 – 20:20 | 17:48 – 20:12 | 17:48 |
| Hyderabad | 18:08 – 20:08 | 17:38 – 20:02 | 17:38 |
| Chennai | 18:07 – 20:09 | 17:37 – 20:01 | 17:37 |
| Kolkata | 17:20 – 19:19 | 16:52 – 19:16 | 16:52 |
| Pune | 18:24 – 20:25 | 17:55 – 20:19 | 17:55 |
| Ahmedabad | 18:22 – 20:21 | 17:54 – 20:18 | 17:54 |
दूसरा शहर
यह तारीख़ क्यों
अनुष्ठान के लिए पूजा के समय कृष्ण अमावस्या चल रही होनी चाहिए। 8 नवंबर 2026 को Delhi में वह चल रही है - इसीलिए लक्ष्मी पूजा उस दिन है, भले कैलेंडर उस दिन को कृष्ण चतुर्दशी का नाम देता है, जो सूर्योदय की तिथि है।
Swiss Ephemeris और लाहिरी अयनांश से, हर शहर के अपने सूर्योदय-सूर्यास्त से गणना। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद के 2 घंटे 24 मिनट लिया गया है; सूर्यास्त पर ही पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर होता है, इसलिए सीमा का एक मिनट भिन्न हो सकता है।
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हमारा AI ज्योतिषी वह कुंडली पढ़ता है जो आपके विवरण से Swiss Ephemeris गणना करती है।
AI ज्योतिषी से बात कीजिएअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मेरे कैलेंडर में लक्ष्मी पूजा की तारीख़ अलग क्यों है?
- क्योंकि तिथि दिन नहीं होती। वह एक क्षण पर शुरू और एक क्षण पर समाप्त होती है, और त्योहार उस दिन पड़ता है जिस दिन उसकी तिथि उस समय मौजूद हो जब अनुष्ठान होना है - सायंकालीन पूजा के लिए शाम को। छपा कैलेंडर हर दिन को सूर्योदय की तिथि का नाम देता है, और वह अक्सर पिछली तिथि होती है। हम पूजा के क्षण की तिथि देखते हैं, वही नियम जो पंचांग उपयोग करते हैं।
- मुंबई और दिल्ली में मुहूर्त अलग क्यों है?
- दोनों के सूर्यास्त में लगभग आधे घंटे का अंतर है, और उदित राशि आपके ही शहर के आकाश से चलती है। पूरे भारत के लिए छपा एक समय उसमें लगभग हर जगह के लिए ग़लत है।
- क्या मुहूर्त के बाहर का समय इस्तेमाल कर सकते हैं?
- मुहूर्त परंपरा में पसंदीदा समय है, कोई अंतिम सीमा नहीं। अगर आपके परिवार की परंपरा अलग है या आपके पंडित जी कोई और समय देते हैं, उसी का पालन कीजिए - ये गणना किए गए समय हैं, नियम नहीं।